Friday, April 10, 2009

B A Programme English II, Second Year, Delhi University

B.A. (Prog.) IInd Year, English II (A)

FLUENCY IN ENGLISH II
for those who have english subjects till class 12th
2008 - 2009 syllabus (NOTE: PLEASE FOLLOW YOUR OWN SYLLABUS)

हिन्दी अनुवाद के साथ

CONTENT
  1. Learning to Write -
  2. Learning can be Fun
  3. Billy Elliot is My Story, Only Less Happy
  4. If I Return This Time
  5. Learning To Write (Editing)
  6. A Mother's Decision
  7. Sole Provider, Lonely (अकेला) Warrior (योद्धा, सिपाही)
  8. Pholiographing (फोटोग्राफी सम्बन्धी) Mother
  9. What Makes Good Writing Good
  10. Our Muddledad Generation
  11. The LEader of Man
  12. Writing for Examinations
  13. The End of a Yuga
  14. Maniben Alias Bibijan
  15. Her Name is Bharti
GRAMMER
  1. Comprehension - (धारणा, समावेश, व्यापकता, परिज्ञान, बोध, समझ, अवधारणा, समझ बूझ)
  2. Grammer - Use of Article (a, an, the); Use of Nouns (संज्ञा); Use of Pronouns (सर्वनाम); Use of Adjective (गुण वाचक शब्द, विशेषण); Use of Verb (क्रिया); Use of Adverbs (क्रिया विशेषण) कुछ उदहारण के लिए यहाँ क्लिक करें ; Use of Prepositions (पूर्वसर्ग); Use of Conjunction (समुच्यबोधक) कनजंकशंस की प्रक्टिस के लिए यहाँ क्लिक करें Click Here;
  3. Vocabulary - Antonyms (विपरीतार्थक शब्द); Important Antonyms; Homophones (विस्तार के लिए यहाँ क्लिक करें )
  4. General Rules Regarding Letter Writing- Parts of Letter; Informal Letters, Formal Letters;
  5. Essays -
    Television and Teenage Violence For Details Click Here ;
    The Population Problem; for details or essay click here ;
    The Contribution of Students in National Building;
    The Position of Women (2007);
    United We Stnd, Divided We fall;
    Terrorism; For Details Click Here ;
    Future of English Language in India;
    The Problem of Price Rising; E-Commerce;
    India's Most Pressing Problems;
    Child Labour;
    My Likes and Dislikes;
    Metro Applications Today;
    The Choice of a Profesiona;
    Wonders of Science; Pollution;
    The Value of Gamesand Sports,
    Merits and Demerits of the India and Internet;
    The drie Necessity of Computerisation;
    Non-Conventional Energy Sources;
    Unemployment;
    The Problem of Indispline Among Students;
    Importance of Discipline in Life, Criminialisation in Politics;
    Capital Punishment;
    Protection of human rights;
    Economic Liberalisation;
    Student and Politics;
    Black Money;
    The Information Technology Revolution;
    Cyber Criminals;
    AIDS;
    Youth and Drugs;
    Religion and Science;
    The Corruption Menace;
    Reservation Re-defined;
    India's Space Programme;
    The Generation Gap.

LESSON - 1 (Learning to Write)

(a) Writing is perhaps the most difficult of all the most difficult of all the language skills, Even seasoned (experienced) writers have to make drafts of what they wish to convey before they are satisfied. Most of us are simply scared of pen and paper yet, there is not getting away from writing. Whether we want to remember, convey, or correct something, it is best to put it down in black and white. Anyone who can write is looked upon with respect in our society.
लेखन कला शायद अन्य समस्त भाषाई कुशलताओं में सर्वाधिक कठिन है । अनुभवी परिपक्व लेखकों को भी उस बात का, जिसको कि वे व्यक्त करना चाहते हैं - प्रारूप तयार करना पड़ता है, तब जाकर उन्हें संतोष होता है ; हममें से अधिकांश लोग कलम और कागज़ से भयभीत होते हैं, फिर भी लेखन कार्य से छुटकारा सम्भव नही है । जब भी हम किसी बात को स्मरण रखना चाहते हैं, दूसरो तक पहुँचाना चाहते हैं अथवा किसी चीज़ में सुधर करना चाहते हैं, उसे कागज़ पर लिख लेना ही सर्वोत्तम है । जो व्यक्ति लिखने में निपुण हैं, उनको समाज में सम्मान मिलता है ।
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(b) If you want to apply for a job, you must write out your curriculum vitae as well as a covering letter. Now-a-days recruitment agencies prefer that applicants wrote an essay in their own handwriting because it is believed that writing reveals your true personality traits, such as sincerity, commitment, attitude and social responsibility. In fact, handwriting is as individual as fingerprints.
यदि आप किसी नौकरी के लिए आवेदन पत्र भेजना चाहते हैं तो आपको अपनी शैक्षिक योग्यता तथा उसके साथ एक आवरण पत्र भी लिखना होता है । आजकल चयनकर्ता संस्थयें यह बात अधिक पसंद करती हैं कि आवेदक अपने हाथ से एक निबंध लिखे क्यौंकी यहाँ माना जाता है की हस्तलेख आपके वास्तविक व्यक्तिगत गुणों, जैसे किंदारी, प्रतिबधता, दृष्टिकोण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को अनावृत (प्रकट) कर देता है । वास्तव में हस्तलेख उतना ही व्यक्तिगत या प्रथक अस्तित्व रखता है जितना की अँगुलियों की छाप ।
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(3) Yet, instruction in writing has generally consisted of providing students with models of good writing and letting them muddle (make way 'confuse state of mind - मार्ग निर्माण करना, भ्रमित करना / होना, दीमाग भ्रम में होना) their way through. This is a long and tedious (थकाने वाला, धीमा, कठिन) process and students are generally left to their own devices. Teachers only perform the task of 'correcting' and 'grading'. Some of the students gamely struggle on, but most just drop by the wayside (किनारे हो जन, रस्ते से भटक जाना, त्याग देना).
तथापि लेखन में निर्देश में सामान्यतः यह निहित होता है - छात्रों को श्रेष्ठ लेखन के नमूने सुलभ करा देना तथा फिर उन्हें अपना मार्ग खोजने देना । यह मार्ग लंबा तथा दुष्कर प्रक्रिया है तथा प्रायः छात्रों को अपनी ही नियुक्ति के सहारे छोड़ दिया जाता है । अध्यापक तो मात्र उनकी त्रुटियों सुधारने तथा उन्हें अंक या श्रेणी देने का कार्य करते हैं।
कुछेक छात्र स्वयं संघर्ष करते हुए आगे बढ़ जाते हैं लेकिन कुछ मार्ग से हट जाते हैं। अथवा पीछे छुट जाते हैं ।
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(4) First of all, most of us think we know our feelings, ideas and subject, but it is only when we sit down to write that we relize how muddled (अस्पष्ट) our thoughts are, so, in a very important sense, free writing helps us clarify our thoughts, In addition, when we write for ourselves and not to please, imress, or convince others, we tend to be more honest and open.
सर्वप्रथम, हममें से अधिकांश लोग सोचते हैं कि हम अपनी भावनाओं को विचारों को तथा विषय को भली-भांति जानते हैं, पर जब हम उन्हें लिखने या लिपिबद्ध करने बैठते हैं, तो हम यह अहसास करते हैं कि हमारे विचार कितने अस्पष्ट हैं । इसीलिए एक महत्वपूर्ण दृष्टी से मुक्त लेखन हमे अपने ही विचारों को स्पष्ट रूप से समझने में सहायक होता है । इसके अतिरिक्त, जब हम अपने लिए ही लिखते हैं, किसी को खुश करने, प्रभावित करने अथवा उसे आश्वस्त करने के लिए नही लिखते तो हम स्वाभाविक रूप से अधिक इमानदार और स्पष्टवादी बनने कि और प्रवृत हो जाते हैं।
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LESSON - 2 (Learning can be Fun)
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(1) The time we realised that an average child is not interested in all of these subjects. We have to come across a child who is not happy to get a 'free period'. When childredn are coaxed (फुसलाया जाता है) graded, and forced into learning they turn out to be indifferent scholars who scrape through school and college and become dull office workers, uncreative teachers, medicore engineers, and unimaginative factory managers.
यहाँ समाया आ गया है कि हम महसूस करें कि औसतन बच्चे को इन समस्त विषयों में कोई रूचि नही होती। हमें ऐसा कोई बच्चा नही मिलेगा जो खली पीरिअड मिलने पर हर्षित न हो जाये। जब बच्चों को पढने के लिए फुसलाया, आगे धकेला या धमकाया जाता है तो वे ऐसे उदासीन अध्यानकर्ता बन जाते हैं जो किसी प्रकार से शिक्षा पुरी कर लेते हैं, तथा जीवन में वे घटिया आफिसर, रचनात्मकता से रहित शिक्षक, औसत श्रेणी के इंजिनियर तथा कल्पनाराहित कारखाना प्रबंधक बन जाते हैं ।
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(2) There is a mistaken notion (thinking) that learning takes place only within a structured school framework. Unschooled people like tribals (आदिवासी) have more knowledge about plant life, herbs, trees, animal behaviour and so on than the botanist (वनस्पतिशास्त्री ) or zoologist (प्राणी शास्त्री) . Illitrate village folks (स्थानीय लोग) have immense knowledge about growing crops, domesticating animals, weaving and house building. Children in such societies acquire the skills and knowledge for survival by observing and participating in these activities.
यह एक ग़लत धारणा है कि शिक्षा केवल विद्यालयों कि सरंचना अर्थात भवन में नियमों से बांधकर ही हो सकती है । अशिक्षित लोग जैसे आदिवासी लोगों को पौधे, जडी बूटीयों, पशुओं के व्यवहार आदि के बारे में किसी भी वनस्पति शास्त्री अथवा जीव विज्ञान शास्त्री से अधिक जानकारी होती है । अनपढ़ गाँव वालों के पास भी फसल उगने, पशु पालन, वस्त्र बुनने तथा घर निर्माण कि अच्छी जानकारी होती है । ऐसे समाजों में बच्चे इस प्रकार के कामों को देखकर तथा उनके प्रतिभागी बनकर जीने कि कला के बारे में कुशलता एवं ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं।
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(3) Today's students know a lot. One has to just look at the quiz competitions. But they understand little and feel much less. They have mastered the art of debating (वाद विवाद प्रतियोगिता), declaiming (बखान करना, भाषण देना) and recting on a variety of usual ranging from communalism (साम्प्रादाईक्ता) & gender justice (लैंगिक अधिकार), nuclear disarmament (निःशस्त्रीकरण) , and ozone depletion (reduction, क्षरण या क्षतिहोना). But once they are off stage, they stop carring about the issue they just debated.
आज के छात्र बहुत अधिक जानते हैं । जरा प्रश्नोत्तर स्पर्धाओं को देखिये । पर वे अत्यल्प समझते है और महसूस बहुत कम करते हैं । उन्हें वाद विवाद कला पर स्वामित्व प्राप्त कर लिया है, वे किसी विषय पर जोरदार भाषण दे सकते हैं, अनेक विषयों पर बोल सकते हैं, जैसे सम्प्रदियाकता, महिलाओं के सामन अधिकार (लिंगवाद), परमाणु शास्त्रों पर रोक, और ओजोन में आई खराबिओं पर, लेकिन जैसे ही वे मंच से उतरते हैं वे इस विषय के सम्बन्ध में परवाह करना बंद कर देते हैं जिस पर उन्हों ने अभी अभी वाद विवाद किया था ।
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(4) Learning is a process - sometimes tedious, sometimes exciting, sometimes frustating and sometimes fulfilling. But today we are in amad rush to reach the top, to suceed, to leave others behind. Schools, as a microcosm (सूक्षम आधार) of society, are also cought in the competition. They compete with each other for more medals, more trophies and more recognition. The casualty of such competition is children learning.
सीखना या शिक्षा ग्रहण करना ऐसी प्रक्रिया है जो कभी
ष्टदायक होती है तो कभी उतेजित करने वाली, कभी निराश करने वाली तो कभी सफलता कि खुशी देने वाली। पर आजकल हम लोग सफल होने व अन्यों को पीछे छोड़ कर शिखर पर पहुँचने कि पागलपन से पूर्ण स्पर्धा में जुटे हुए हैं । स्कूल भी जो कि समाज का सूक्षम आधार हैं, इस स्पर्धा में फंस गए हैं । वे अधिकाधिक तमगों तथा विजयोपहरों को पाने व अधिक पहचान बनाने के लिए परस्पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इस स्पर्धा में सर्वाधिक नुक्सान बच्चों के सीखने कि प्रक्रिया को होता है ।
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However, the process of doing - writing an essay or printing a portrait - is more important. The frustation of not getting it the way you want, the ability to overcome an obstacle, the joy of discovery, and the confidence of being in control, we rob (deny, वंचित करना) our children of all these experiences by doing their work for them. We forget that making a mistake is a natural part of learning.
तथापि काम करने की प्रक्रिया - निबंध लेखन अपना चित्र बनाना - अधिक महत्तवपूर्ण है । किसी भी काम को अपनी आकांक्षा के अनुसार न कर पाने पर क्षोभ, या किसी भी बाधा को पार करने की क्षमता, या किसी नई चीज़ खोजने कि खुशी तथा स्तिथि पर नियंत्रण पा लेने से उत्पन्न विश्वास - हम अपने बच्चों को इन सभी अनुभवों से वंचित कर देता हैं क्यूंकी हम उनका काम स्वयम मर देता हैं । हम भूल जाते हैं की गलती करना सिखने कि प्रक्रिया का एक स्वाभाविक भाग है।
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Language and communication are something that children learn by talking to one-another. But schools consider this an act of





LESSON - 3



LESSON - 4



LESSON - 5



LESSON - 6



LESSON - 7



LESSON - 8



LESSON - 9



LESSON - 10



LESSON -11



LESSON -12



LESSON -13



LESSON -14























4 comments:

hopper said...

hey please upload the chapters no. 3 to 8 , my exam is on this Tuesday please help.

samit ravat said...

Friends please post other chapter's notes ...i need it ..

supriya yengkhom said...

I want the summary of chapter 14

supriya yengkhom said...

I want the summary of chapter 14